गृह मंत्रालय की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) ने सोमवार को इस संबंध में एडवाइजरी जारी की। इसमें बताया गया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया विज्ञापनों, फोन कॉल और व्हाट्सएप संदेशों के जरिये लोगों को निशाना बना रहे हैं। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना या आर्थिक सहायता के दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।
डीपफेक वीडियो से लोगों को बनाया जा रहा निशाना
एडवाइजरी के मुताबिक, धोखेबाज मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन प्रसारित कर रहे हैं, जिनमें सार्वजनिक हस्तियों के वीडियो के साथ छेड़छाड़ की जाती है। इन वीडियो में नेताओं को कथित तौर पर जरूरतमंद लोगों के लिए वित्तीय सहायता योजना की घोषणा करते या उसका प्रचार करते हुए दिखाया जाता है।
इन विज्ञापनों में दिए गए फोन नंबरों पर संपर्क करने या लिंक पर क्लिक करने के बाद लोगों को जालसाजों के संपर्क में लाया जाता है। कुछ मामलों में उपयोगकर्ताओं को ऐसी वेबसाइटों पर भेजा जाता है, जहां नकली स्क्रैच कार्ड, कैशबैक रिवॉर्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं के जरिये उन्हें इनाम का लालच दिया जाता है।
जालसाज दावा करते हैं कि संबंधित व्यक्ति को सरकारी सहायता या इनाम के लिए चुना गया है। इसके बाद राशि जारी करने से पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज, वेरिफिकेशन फीस या अन्य प्रशासनिक खर्चों के नाम पर बार-बार भुगतान करने को कहा जाता है। पीड़ित इस उम्मीद में रकम भेजते रहते हैं कि उन्हें वादा की गई सहायता मिल जाएगी, लेकिन अंत में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
+92 नंबर से आने वाली कॉल को लेकर चेतावनी
गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। एडवाइजरी में विशेष रूप से +92 से शुरू होने वाले नंबरों का उल्लेख किया गया है, जो पाकिस्तान का कंट्री कोड है।
ऐसी कॉल में फोन करने वाले खुद को किसी सार्वजनिक हस्ती, सरकारी अधिकारी या उनके कार्यालय का प्रतिनिधि बता सकते हैं। वे दावा कर सकते हैं कि व्यक्ति को आर्थिक सहायता या किसी सरकारी योजना के लाभ के लिए चुना गया है। इसके बाद लाभ दिलाने के नाम पर पैसों की मांग की जाती है।
मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी है कि केवल किसी व्यक्ति के सरकारी अधिकारी होने के दावे पर भरोसा न करें। संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम से उसकी पहचान की पुष्टि करें। संदेह होने पर संबंधित सरकारी कार्यालय से सीधे संपर्क कर जानकारी लें।
UPI रिक्वेस्ट मंजूर करते ही खाते से कट सकते हैं पैसे
एडवाइजरी में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिये होने वाली धोखाधड़ी को लेकर भी आगाह किया गया है। कुछ मामलों में जालसाज पीड़ितों को पेमेंट ऐप पर भेजकर इनाम या कैशबैक प्राप्त करने के बहाने UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट मंजूर करवाते हैं।
लोगों को लगता है कि वे इनाम की राशि प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं, जबकि वास्तव में वे अपने खाते से भुगतान की अनुमति दे रहे होते हैं। कई बार उनसे ट्रांजैक्शन पूरा करने के लिए UPI PIN दर्ज करने को कहा जाता है। इसके बाद उनके खाते से रकम जालसाज के खाते में चली जाती है।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि UPI PIN का इस्तेमाल पैसे भेजने या भुगतान को मंजूरी देने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। इसलिए किसी भी रिक्वेस्ट को मंजूर करने से पहले स्क्रीन पर दिख रही राशि, प्राप्तकर्ता और ट्रांजैक्शन का उद्देश्य ध्यान से जांचना चाहिए।
आधार, PAN और OTP जैसी जानकारी साझा न करें
NCTAU ने नागरिकों को आधार नंबर, PAN कार्ड की जानकारी, बैंक खाते का विवरण, OTP और UPI PIN जैसी संवेदनशील जानकारी अज्ञात व्यक्तियों के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी है। किसी भी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर ऐसी जानकारी मांगने वाले व्यक्ति की पहचान की जांच करना जरूरी है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर सरकारी अधिकारियों के वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग में किए गए दावों की पुष्टि की जानी चाहिए। केवल वीडियो देखकर किसी योजना को असली न मानें, क्योंकि डीपफेक तकनीक के जरिये किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरे में बदलाव करके भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर मिले विज्ञापनों के आधार पर तुरंत भुगतान न करें। संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ से जुड़ी जानकारी जांचें। किसी भी भुगतान से पहले उसके उद्देश्य और प्राप्तकर्ता की पुष्टि करें।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
गृह मंत्रालय ने साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वाले लोगों से बिना देर किए शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। पीड़ित वित्तीय साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
समय रहते शिकायत करने से संबंधित लेनदेन की जांच और रकम रोकने की संभावनाओं में मदद मिल सकती है। इसलिए ठगी का पता चलने पर बैंक और संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को भी तुरंत सूचना देना उपयोगी है।
गृह मंत्रालय की एडवाइजरी का मुख्य संदेश है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले सरकारी योजनाओं के विज्ञापनों, डीपफेक वीडियो और मुफ्त इनाम के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी योजना की पुष्टि आधिकारिक माध्यमों से करें और याद रखें कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालना या अनजान व्यक्ति को पहले फीस देना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। सतर्कता और समय पर शिकायत साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है।

